सूरह अल-इखलास (एकेश्वरवाद)
سورة الإخلاص
सूरह #1124 आयतेंमक्कीपारा 30
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अनुवाद:
रुकू 1 (رُكُوْعُهَا ١)
(112) सूरह अल-इखलास (एकेश्वरवाद) (मक्की सूरह)
आयत 4 (آيَاتُهَا ٤)
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
قُلۡ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ ١ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ ٢لَمۡ يَلِدۡ وَلَمۡ يُولَدۡ ٣وَلَمۡ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدُۢ ٤
📖 Page 1 Verse-by-Verse Translations
Ayah 1
Say, "He is Allah, [who is] One
Ayah 2
Allah, the Eternal Refuge
Ayah 3
He neither begets nor is born
Ayah 4
Nor is there to Him any equivalent
सूरह अल-इखलास (एकेश्वरवाद) के बारे में
सूरह अल-इख़लास तौहीद की रूह है। इसमें अल्लाह ताला के एक (अहद), बेनियाज़ (समद), औलाद और वालिदैन से पाक होने का ऐलान है। यह एक तिहाई कुरान के बराबर है।
📜📜 अवतरण इतिहास व काल
श्रेणी: मक्की सूरह
प्रमुख विषय व पाठ
- अल्लाह ताला की तौहीद और वाहदानियत (एकेश्वरवाद)
- अल्लाह 'समद' है: बेनियाज़, सब उसका मोहताज हैं और वह किसी का मोहताज नहीं
- Rejection of divine lineage: He neither begets nor is born
- Complete incomparability: Nothing is equal or equivalent to Him
तिलावत के मुख्य अवसर
हर नमाज़ के बाद, वित्र, फ़ज्र व मग़रिब की सुन्नतों में, सोने से पहले और रोज़ाना के अज़्कार में 3 बार पढ़ी जाती है।
👑👑 आला हज़रत व अहले सुन्नत विद्वत संदर्भ
- Kanzul Iman — Translation by Aala Hazrat Imam Ahmad Raza Khan (رحمۃ اللہ علیہ)
- Fatawa Razvia — Vol. 26 (Tafseer & Recitation Virtues)
- Bahar-e-Shariat (Sadr al-Shariah)
प्रमाणिक हदीस व शास्त्रीय स्रोत
Sahih al-Bukhari 5013Sahih Muslim 811