सूरह अल-अस्र (समय)
سورة العصر
सूरह #1033 आयतेंमक्कीपारा 30
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अनुवाद:
रुकू 1 (رُكُوْعُهَا ١)
(103) सूरह अल-अस्र (समय) (मक्की सूरह)
आयत 3 (آيَاتُهَا ٣)
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
وَٱلۡعَصۡرِ ١إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ لَفِي خُسۡرٍ ٢إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ وَتَوَاصَوۡاْ بِٱلۡحَقِّ وَتَوَاصَوۡاْ بِٱلصَّبۡرِ ٣
📖 Page 1 Verse-by-Verse Translations
Ayah 1
By time
Ayah 2
Indeed, mankind is in loss
Ayah 3
Except for those who have believed and done righteous deeds and advised each other to truth and advised each other to patience
सूरह अल-अस्र (समय) के बारे में
सूरह अल-अस्र (ज़माना) में ज़माने की क़सम खाकर इंसानी घाटे से बचने के 4 रास्ते: ईमान, अमले सालेह, हक़ की ताकीद और सब्र की ताकीद का बयान है।
📜📜 अवतरण इतिहास व काल
श्रेणी: मक्की सूरह
प्रमुख विषय व पाठ
- Oath by Time (Al-Asr) that humanity is naturally in loss
- आज़माइशों में सब्र और अल्लाह ताला पर भरोसा
तिलावत के मुख्य अवसर
रोज़ाना नमाज़ों में, अज़्कार में और तिलावत-ए-कुरान के दौरान पढ़ी जाती है।
👑👑 आला हज़रत व अहले सुन्नत विद्वत संदर्भ
- Kanzul Iman — Translation by Aala Hazrat Imam Ahmad Raza Khan (رحمۃ اللہ علیہ)
- Fatawa Razvia — Vol. 26 (Tafseer & Recitation Virtues)
- Bahar-e-Shariat (Sadr al-Shariah)
प्रमाणिक हदीस व शास्त्रीय स्रोत
Sunan Al-Bayhaqi Shu'ab al-Iman 8638