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सूरह अल-फ़ातिहा (प्रारंभ)

سورة الفاتحة

सूरह #17 आयतेंमक्कीपारा 1
फ़ॉन्ट आकार:36px
अनुवाद:
रुकू 1 (رُكُوْعُهَا ١)
(1) सूरह अल-फ़ातिहा (प्रारंभ) (मक्की सूरह)
आयत 7 (آيَاتُهَا ٧)
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ۝١ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ ۝٢ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ۝٣مَٰلِكِ يَوۡمِ ٱلدِّينِ ۝٤إِيَّاكَ نَعۡبُدُ وَإِيَّاكَ نَسۡتَعِينُ ۝٥ٱهۡدِنَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلۡمُسۡتَقِيمَ ۝٦صِرَٰطَ ٱلَّذِينَ أَنۡعَمۡتَ عَلَيۡهِمۡ غَيۡرِ ٱلۡمَغۡضُوبِ عَلَيۡهِمۡ وَلَا ٱلضَّآلِّينَ ۝٧

📖 Page 1 Verse-by-Verse Translations

Ayah 1

In the name of Allah, the Entirely Merciful, the Especially Merciful

Ayah 2

[All] praise is [due] to Allah, Lord of the worlds

Ayah 3

The Entirely Merciful, the Especially Merciful

Ayah 4

Sovereign of the Day of Recompense

Ayah 5

It is You we worship and You we ask for help

Ayah 6

Guide us to the straight path

Ayah 7

The path of those upon whom You have bestowed favor, not of those who have evoked [Your] anger or of those who are astray

सूरह अल-फ़ातिहा (प्रारंभ) के बारे में

सूरह अल-फ़ातिहा पवित्र कुरान का मूल अध्याय है। इसे 'उम्मुल किताब' (किताब की मां) और 'असब अल-मथानी' (बार-बार दोहराई जाने वाली सात आयतें) कहा जाता है। इसमें इस्लाम के मूल सिद्धांतों: अल्लाह की हम्द ओ सना, केवल अल्लाह की इबादत और सीधे रास्ते (सिराते मुस्तकीम) की हिदायत का बयान है।

📜📜 अवतरण इतिहास व काल

श्रेणी: मक्की सूरह (#5)

अवतरण संदर्भ: मक्का मुकर्रमा में नाज़िल हुई। इसमें अक़ाइद, तौहीद और आख़िरत के बुनियादी दलाइल शामिल हैं।

प्रमुख विषय व पाठ

  • तमाम जहानों के रब अल्लाह ताला की हम्द ओ सना और शुक्रगुज़ारी
  • केवल अल्लाह की इबादत और उसी पर भरोसा करने का ऐलान
  • सीधे रास्ते (सिराते मुस्तकीम) की हिदायत की दुआ

तिलावत के मुख्य अवसर

फ़र्ज़ और नफ़्ल नमाज़ की हर रकअत में पढ़ना अनिवार्य है। इसके अलावा सुबह-शाम के अज़्कार और रूहानी इलाज (रुक्या) में पढ़ी जाती है।

👑👑 आला हज़रत व अहले सुन्नत विद्वत संदर्भ

  • Kanzul Iman — Translation by Aala Hazrat Imam Ahmad Raza Khan (رحمۃ اللہ علیہ)
  • Fatawa Razvia — Vol. 10 & Vol. 26 (Tafseer of Surah Al-Fatihah & Recitation Rulings)
  • Bahar-e-Shariat — Part 3 (Obligatory Recitation in Salah)

प्रमाणिक हदीस व शास्त्रीय स्रोत

Sahih al-Bukhari 756Sahih Muslim 395
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