चौथा कलिमा
कलिमा तौहीद — كَلِمَة التَّوْحِيد
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، يُحْيِي وَيُمِيتُ، وَهُوَ حَيٌّ لَا يَمُوتُ أَبَدًا أَبَدًا، ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ، بِيَدِهِ الْخَيْرُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
उच्चारण निर्देश (लिप्यंतरण)
“Laa ilaaha illallaahu wahdahu laa shareeka lahu, lahul mulku wa lahul hamdu, yuhyee wa yumeetu, wa huwa hayyun laa yamootu abadan abada, dhul jalaali wal ikraam, biyadihil khayru, wa huwa 'alaa kulli shay-in qadeer”
अनुवाद और अर्थ
स्रोत: दावते इस्लामीअल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी का राज्य है और उसी की प्रशंसा है, वही जीवन देता है और वही मृत्यु देता है, और वह जीवित है जिसे कभी मृत्यु नहीं आएगी, महिमा और सम्मान वाला है, उसी के हाथ में सब भलाई है और वह हर चीज़ पर सामर्थ्यवान है।
अर्थ एवं शैक्षणिक व्याख्या
The Fourth Kalima (Kalima Tauheed - Word of Oneness) highlights the majesty, eternal authority, and omnipotence of Almighty Allah. It declares that all kingship and praise belong solely to Him.
ℹ️ 6 कलिमों को समझें & स्रोत: दावते इस्लामी
6 कलिमे बुनियादी इस्लामी विश्वासों को व्यक्त करते हैं: तौहीद का इक़रार, मुहम्मद (ﷺ) की रिसालत की गवाही, अल्लाह की पाकी और बड़ाई, अस्तग़फ़ार और कुफ़्र व शिर्क का इंकार। सलाह लाइव पर सभी कलिमों का पाठ दावते इस्लामी के प्रामाणिक प्रकाशनों पर आधारित है।