दूसरा कलिमा
कलिमा शहादत — كَلِمَة الشَّهَادَة
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
उच्चारण निर्देश (लिप्यंतरण)
“Ash-hadu an laa ilaaha illallaahu wahdahu laa shareeka lahu wa ash-hadu anna Muhammadan 'abduhu wa rasooluh”
अनुवाद और अर्थ
स्रोत: दावते इस्लामीमैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं।
अर्थ एवं शैक्षणिक व्याख्या
The Second Kalima (Kalima Shahadat - Word of Evidence/Testimony) is the formal testimony of belief. It emphasizes that Allah is unique without any associates or partners, and underscores that Prophet Muhammad (ﷺ) is Allah's devoted servant as well as His messenger.
ℹ️ 6 कलिमों को समझें & स्रोत: दावते इस्लामी
6 कलिमे बुनियादी इस्लामी विश्वासों को व्यक्त करते हैं: तौहीद का इक़रार, मुहम्मद (ﷺ) की रिसालत की गवाही, अल्लाह की पाकी और बड़ाई, अस्तग़फ़ार और कुफ़्र व शिर्क का इंकार। सलाह लाइव पर सभी कलिमों का पाठ दावते इस्लामी के प्रामाणिक प्रकाशनों पर आधारित है।